अध्याय 1: लौटते कदम विवेक, प्रवेग और रिशु बचपन के तीन सबसे अच्छे दोस्त थे। उनका गाँव पहाड़ों और खेतों से घिरा हुआ था। बचपन से ही उन्होंने एक-दूसरे के साथ खेला, पढ़ाई की और बड़े सपने देखे थे। लेकिन गरीबी ने उन्हें गाँव छोड़कर शहर जाने पर मजबूर कर दिया। शहर में तीनों एक फैक्ट्री में काम करने लगे। सुबह से देर रात तक मेहनत करते, ताकि अपने परिवारों को पैसे भेज सकें। कई साल बीत गए। ज़िंदगी कठिन थी, लेकिन उम्मीद अभी भी ज़िंदा थी। एक दिन फैक्ट्री में जहरीले रसायनों के संपर्क में आने से तीनों की तबीयत बिगड़ने लगी। पहले हल्की खाँसी हुई, फिर तेज़ बुखार, साँस लेने …
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